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आर्यावर्त बैंक की शिकायत - बैंक द्वारा न्यूनतम मजदूरी न दिया जाना

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DOPT (डीओपीटी) के आदेश का पालन कैसे होगा ?

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 लोक प्राधिकरणों द्वारा प्राप्त आरटीआई आवेदनों, अपीलो एवं उनके उत्तरों को उनकी वेबसाइट पर अपलोड किए जाने के संबंध में डीओपीटी द्वारा 2016 में एक पत्र जारी किया गया था। इस पत्र पर शायद ही किसी लोक प्राधिकरण ने कार्यवाही की होगी।

RTI कार्यकर्ता को 5 लाख का मुआवजा और नौकरी

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यह ताजा ताजा मामला नहीं है, पिछले वर्ष का है। लेकिन बहुत महत्वपूर्ण है। एक ओर आरटीआई कार्यकर्ता के साथ अवैध शराब व्यवसायियों ने बर्बरता पूर्वक व्यवहार किया था, वहीं दूसरी ओर पुलिस भी पीड़ित को ही परेशान कर रही थी। पुलिस ने अप्रत्यक्ष रूप से अपराधियों को समर्थन दिया और पीड़ित को अपना धरना हटाने के लिए अन्यायपूर्वक दबाव बनाया था। इस मामले में आरटीआइ कार्यकर्ताओं ने श्री अभिषेक कुमार के नेतृत्व में सामूहिक ईमेल के द्वारा प्रशासन / सरकार पर प्रभावी दबाव बनाया, जिसके फलस्वरूप धरना हटवाने की साजिश सफल नहीं हो सकी और धरना सफलतापूर्वक संपन्न हो सका। इस संबंध में आरटीआई कार्यकर्ताओं  द्वारा प्रेषित की गई ईमेल पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।  

गिलास आधा भरा है या आधा खाली ? आप ही तय करें।

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  आज मैं चुप रहूंगा !

अगर सुधरेंगे नहीं, तो पेले जायेंगे जन सूचना अधिकारी।

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प्रयागराज के 150 जन सूचना अधिकारियों पर राज्य सूचना आयोग ने 38 लाख रुपयों की पेनाल्टी लगाई है। यह चेतावनी है उन अधिकारियों के लिए जो अपनी कुर्सी की पावर के नशे में अपने को कानून के ऊपर समझने लगे हैं।  

बहुत महंगा पड़ा सूचना न देना, अब भरेंगे 35000 का जुर्माना

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इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस निर्णय ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यदि सही आरटीआई फाइल की गई हो और बिना त्रुटी के अपील /शिकायत भी दायर की गई हो तो जन सूचना अधिकारी (सूचना न देने पर) जुर्माना से बच न सकेंगे। इस मामले में सूचना आयोग द्वारा जन सूचना अधिकारी पर 25000/- का दंड लगाया गया, जिसे इलाहाबाद हाई कोर्ट बरकरार रखा और दस हजार रु का जुर्माना भी लगाया।  

2600 Public Information Officers penalized by SIC UP

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उतर प्रदेश में 2600 जनसूचना अधिकारियों  पर  6.50 करोड का जुर्माना राज्य सूचना आयोग द्वारा लगाया गया है।